नैना मोर तरसथे ।
सावन के बरखा कस,
आंखी मोर बरसथे ।
गुनत रहिगेवं तोला,
तभु ले तै आए नहीं ।
मया बरसाए नही ,
मोला तै भिगाए नहीं ।
तोर खातिर दिल ,
लाख जतन करथे ।
सावन के बरखा कस,
आंखी मोर बरसथे ।
तोर प्यार के नशा ,
तरूआ मा चढ़गे ।
सुरता मा तोर ,
मोर हालत बिगड़गे ।
मन के गगन मा ,
तोर सुरता गरजथे ।
सावन के बरखा कस,
आंखी मोर बरसथे ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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