देखे बर तोला गोरी dekhe bar tola gori-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

देखे बर तोला गोरी ,
             नैना मोर तरसथे ।
सावन के बरखा कस,
          आंखी मोर बरसथे ।



गुनत रहिगेवं तोला,
          तभु ले तै आए नहीं ।
मया बरसाए नही ,
         मोला तै भिगाए नहीं ।



तोर खातिर दिल ,
            लाख जतन करथे ।
सावन के बरखा कस,
           आंखी मोर बरसथे ।



तोर प्यार के नशा ,
             तरूआ मा चढ़गे ।
सुरता मा तोर ,
           मोर हालत बिगड़गे ।


मन के गगन मा ,
            तोर सुरता गरजथे ।
सावन के बरखा कस,
            आंखी मोर बरसथे ।
देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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