जिनगी मे आजा न बहार बनके ।
आजा ना गोरी , दिल बेकरार हे ।
दिल मा समाजा तै करार बनके ।
मोर मन कहिथे कभु झन उतरे ।
तोर मया चढ़गे न बुखार बनके ।
फुर्सत के बेरा, मिल जाए मोला ।
कभु तो आजा तै इतवार बनके ।
तोर बिना मोर ये मन नई मानय ।
रही जा तै मोर जोड़ीदार बनके ।
फुल जैसे दिल हा, मुरझावत हे ।
अब तो बरस जा बौछार बनके ।
मया के मंदिर मिल के बनाबो ।
दुनिया मा रहय यादगार बनके ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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