लहुट के मोला तै आंखी मारबे ।
सुरता करबे तै दिन भर मोला ।
तड़प तड़प के तै रात गुजारबे ।
मने मन मोला तै गुनत रहिबे ।
घेरी बेरी मोर नाम ल पुकारबे ।
मोला देख के पांव थम जाहि ।
देख के मोला तै बाल संवारबे ।
घर दुरा हा तोला सुहावय नहीं ।
मोला देखे बर फइका उघारबे ।
जानत रहेवं तै मुड़ के निहारबे ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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