जानत रहेवं तै मुड़ के निहारबे janat rhev tai mud ke niharbe-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

जानत रहेवं तै मुड़ के निहारबे ।
लहुट के मोला तै आंखी मारबे ।



सुरता करबे तै  दिन भर मोला ।
तड़प तड़प के तै रात गुजारबे ।

मने मन मोला तै  गुनत रहिबे ।
घेरी बेरी मोर नाम ल पुकारबे ।



मोला देख के  पांव थम जाहि ।
देख के मोला तै बाल संवारबे ।



घर दुरा हा तोला सुहावय नहीं ।
मोला देखे बर फइका उघारबे ।


जानत रहेवं तै मुड़ के निहारबे ।

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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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