हाइकु

हाइकु

सुत्र ५/७/५

सेवा के मेवा
   मिलही  एकदिन
      धीरज  धर.....

मोर  करम
   हवय  बईमान
      देवय  धोखा

ददा  के  हाथ
   किरपा  बरसय
      सकेलो  सब...

पइसा  ऱुख
   पनपे  भष्टाचार
      मुड़  के  पीरा...

पानी  लावय
   बंगाला  के  चटनी
        बड़  सुहाय...

बिदा  बेटी  के
  ददा  बड़  रोवय 
      दाई  सुसके

मोर  मोहना
   जाबे  कहाँ  बाँचके
       रँगहूँ  तोला...

सुग्घर गोठ
   छत्तीसगढ़िहा के
      लगथे मीठ...

रंग बे मोला
   नेवता देवत हों
      आजबे तैहा...

मिलके दुनों
   रचाबो रंग रास
      होरी तिहार...

अपन गोठ
    बढ़िहा जमत हे
        जोड़ी हमर...


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

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