चौपाई
*पॉलीथीन*
पॉलीथीन नहीं उपयोगी।
कहते फिरते लाखों योगी।
काम कभी ये साथ न लावें।
धरती को खुशहाल बनावें।
कागद जानी गायें खाती।
अल्प समय ही वह मर जाती।
चिन्ता व्यापक सब जग जाना।
करे जतन अब बहु विधि नाना।
बन्जर अपनी धरती होती।
पर्यावरण की आँखें रोती।
तकलीफे ये लाखों सहती।
बन्द करे अब धरती कहती।
पॉलीथीन नही है छड़ती।
ढेरों पहाड़ टापू बनती।
करे जरा विचार ये आयें।
पॉलीथीन मुक्त हो जायें।
भारत होगा सुन्दर अपना।
हो हम सबका अब ये सपना।
मिलकर आओ कदम बढ़ाये।
प्रदुषण को अब दूर भगाये।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

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