मनहरण घनाक्षरी कवित्त छंद

मनहरणघनाक्षरी /कवित्त छंद 

//आन बान शान देखो//

आन बान शान देखो,देश का निशान देखो,
लहर लहर करे,नीले आसमान में।
इसकी निराली बात,सबसे है यह खास,
वीरों की थाती मानों,बसा निगेबान में।
लाल बाल पाल भिड़े, आजादी के गीत लिये,
बन गुल जो ये खिले,मेरे बागबान में।
हमने आजादी पायी,तन मन हरषायी,
हुआ गणतंत्र अब,देखो हिन्दूस्थान में।

//माथ मैं नवाऊँ आज//

माथ मैं नवाऊं आज,जिनपे है हमें नाज़,
जय जय करता है,सारा हिन्दूस्थान है।
क्रांतिकारी बनकर,सुख दुःख तजकर,
मेरे हिन्दूस्थान को ये, बनाया महान है।
भित पट तुम खोलो,भारत की जय बोलो,
झूमे नाचे गाए गीत,खेत खलिहान है।
'तोषण' ये आज कहे, मिलकर सब रहे,
एकता के दीप जले,मिले परवाज़ है।

//चुपचाप झिन रहा//

चुप चाप झिन रहा,कुछु कहीं तहूँ कहा,
मनवा के बतिया ल,खोल तैं जुबान ले,
गोठ मोर सुनले तैं,थोर देख लहुट के,
तन झन छुट जाय,मोर ये परान ले.
दिल मा समाय तैहा,नँइ भूलों तोला मैहा,
तोर हँव दिवाना मैं,अपन तैं मान ले.
कहर बरपा न तैं,मोला तरसा न तैं
मोर मया ल पगली,थोरकुन मान ले.

//अटल रहा है सदा//

अटल रहा है सदा,दिल में बसा है सदा,
अटल रहेंगे सदा,पूरे हिंदुस्तान में.
बन के जगनायक,दीनों के ये सहायक,
फूल बन महके ये,सारे गुलिस्तान में.
देश के चिराग बने,देखो सीना ताने चले,
निकले ये शेर सम,भारत की शान में.
याद सदा आयेंगे वो,दिल में समायें हैं जो,
अटल बिहारी बसे,तन मन प्राण में.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़
9617589667

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