*विषय - मानवता*
मानवता ध्यान रहे,
जरा न गुमान रहे,
तालियां मिलेगी सदा,
सारे हिन्दुस्तान में।।१।।
नेकी कर आगे बढ़,
बाधाओं से नित लड़,
डर भर जाये सारे,
जागते शैतान में।।२।।
नरेन्द्र विवेक बने,
शिकागो मे जाके तने,
पाठ दिया मानवता,
जाकर जहान में।।३।।
हम सब मिल साथी,
बाँध चले परिपाटी,
कुसुम अनेक खिले,
नेह के बागान में।।४।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

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