माता की अंतरात्मा से निकली वाणी*_
_*हाथ ले मशाल तू*_
_*उठ मेरे लाल तू,बनके महाकाल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।*_
संकटों की राह पर,
दम्भ भरले बाँह पर।
भीड़ तू चट्टान से,
जय कर तू आह पर।
_*ध्वज तिरंग सम्हाल तू,रूप ले विकराल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।१।।*_
अस्मत लुटे नहीं,
किस्मत मिटे नहीं।
हो विचार क्रांति का,
हिम्मत डिगे नहीं।
_*बनके भूचाल तू,हो प्रलयंकाल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।२।।*_
दुश्मनों का चैन लूट,
होकर सब एकजूट।
कर दे तू शंखनाद,
दुश्मनों के छक्के छूट।
_*बनके लाल बाल तू,दिखा जरा कमाल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे,बाथ ले मशाल तू।।३।।*_
केसरी दहाड़ बन,
हिमालय पहाड़ बन।
काश्मीर की घाटी में,
फौजी की हुंकार बन।
_*खींच दुश्मनों के खाल तू,कर दे धरा लाल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।४।।*_
पापियों की हार हो,
दुष्टों का संघार हो।
एक तेरी जय गुँजे,
हाथ जो तलवार हो।
_*कर दे धमाल तू,हो जाये कमाल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे,हाथ ले मशाल तू।।५।।*_
रगो में रवान भर,
जोश को जवान कर।
ले कलम तू हाथ में,
देश को महान कर।
_*जोहर का लाल तू,खूँ में भर ऊबाल तू।*_
_*घन तिमिर को चीर दे, हाथ ले मशाल तू।।६।।*_
_©®_
_तोषण कुमार चुरेन्द्र_
_धनगंइहा,डौंडी लोहारा_
_छत्तीसगढ़, ४९१७७१_
_मो:-९६१७५८९६६७_

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