* अतकेच तो फरक हे *
_____******_____
शहर अउ गाँव म,
अतकेच तो फरक हे ।
गाँव म जिनगी सरग हे,
तब शहर म नरक हे।।
गाँव
__*__
जुरमिल के जम्मो रहिथों,
सुख-दुख ल मिलके सहिथें।
मनखे बर मनखे जीओ,
सियान मन सबो कहिथें ।।
मनखे कोनो मरगे त,
गाँव भर के लकड़ी छेना।
शहर म कहाँ पाबे,
तरसे चिरई बिना डेना ।।
शहर
__**__
एक दूसर ल जानय नहीं,
नता रिस्ता ल मानय नहीं ।
भूले भटके पूछ लेबे त,
सगा घर ल बतावय नहीं ।।
गाँव के रहवइया ल,
कहिथे ओमन देहाती ।
फसर-फसर सुतत हे,
नइ जाने का होथे पहाती।।
गाँव
__**___
बारी-बेला के साग पान,
खाय खुंदे ले अगराय ।
पारा परोस ल बांट के,
मया परेम ल बगराय।।
गंवईहा शहर जाय निही,
शहरीया गाँव आय निही।
गाँव म आनी-बानी खाय निही,
शहरीया ल नून बासी सुहाय निही।।
_________******__________
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।
*अपन भाखा *
____**_________******_____
शहर अउ गाँव म,
अतकेच तो फरक हे ।
गाँव म जिनगी सरग हे,
तब शहर म नरक हे।।
गाँव
__*__
जुरमिल के जम्मो रहिथों,
सुख-दुख ल मिलके सहिथें।
मनखे बर मनखे जीओ,
सियान मन सबो कहिथें ।।
मनखे कोनो मरगे त,
गाँव भर के लकड़ी छेना।
शहर म कहाँ पाबे,
तरसे चिरई बिना डेना ।।
शहर
__**__
एक दूसर ल जानय नहीं,
नता रिस्ता ल मानय नहीं ।
भूले भटके पूछ लेबे त,
सगा घर ल बतावय नहीं ।।
गाँव के रहवइया ल,
कहिथे ओमन देहाती ।
फसर-फसर सुतत हे,
नइ जाने का होथे पहाती।।
गाँव
__**___
बारी-बेला के साग पान,
खाय खुंदे ले अगराय ।
पारा परोस ल बांट के,
मया परेम ल बगराय।।
गंवईहा शहर जाय निही,
शहरीया गाँव आय निही।
गाँव म आनी-बानी खाय निही,
शहरीया ल नून बासी सुहाय निही।।
_________******__________
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।
*अपन भाखा *
अपन भाखा गोठियाय बर,
का जनी का जियान परत हे।
कामधेनु ल छोड़ के,
कबरी कुतरी ल दुहत हे।।
* हमर भाखा हमर बोली,
मंदरस कस मीठ घोली।
आनी बानी के हाना हावय,
आनी बानी के ठोली।।
गोठिया के तो देख एक घं,...मीठ झोर चुहत हे...!
अपन भाखा गोठियाय बर...कबरी कुतरी ल दुहत हे!!
* का लाज हे दाई के भाखा म,
गोठियाय म नाक नइ कटाय।
उधारी भाखा म टेस मारके,
हमर भरका नइ पटाय।।
अपन खेत ल परिया करके....दूसर के खेत लुवत हे...!
अपन भाखा गोठियायबर....कबरी कुतरी ल दुहत हे..!!
* गरब करव छतीसगढिया आवन,
आन दूसर ले बढ़िया हावन।
खुद कमाथन मेहनत करथन,
तब खेत म अढिया उपजाथन।।
अपन खाथे अपन गाथे...ककरो ल नइ छुवत हे...!
अपन भाखागोठियाय बर....कबरी कुतरी ल दुहत हे!!
* आमा चानी मोर गुरतुर बानी,
मही कढ़ही हे छतीसगढ़ी।
हाथ जोड़ अरजी करे 'नोहर',
मया पिरीत एक मन बड़ही।।
अंधियारी दुरिहाहि मन के..मया के सुरुज हर उगत हे!
अपन भाखा गोठियाय बर.....कबरी कुतरी ल दुहत हे!!
_____________********______________
नोहर आर्य
फरदडीह, (डौंडी लोहारा) जिला बालोद,छ.ग।
Sent from my Samsung Galaxy smartphone.
1 टिप्पणियाँ
बहुत सुग्घर
जवाब देंहटाएं