दाइज के दावन म,
घर के लछमी भूंजावत हे।
वाह रे !बहादुर बेटा,
चारों मुडा सोर गुंजावत हे।।
भउतिकता के फेर म,
नइ चिन्हत हस हीरा ।
मनखे ल मनखे नइ जाने,
जानेस केंवची खीरा ।।
सात बचन सातों किरिया ,
धारे धार बोहावत हे।
थोरको कोन्हो अनबन होइस,
तलाक के रद्दा जोहावत हे।।
बात बात म नता टूटत हे,
दूनो ले बीसवांस छूटत हे।
इहाँ गाय उहाँ भैंस के फेर म,
बसे बसाय घर टूटत हे।।
सीख लेवव सियान ले,
जिनगी अपन पहा दिन हे ।
मया पिरीत के बंधना ल,
कटकट ले गंसिया दिन हे।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

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