* माटी के मितान रे *
______******______
गढ़े विधाता तोला रे संगी,
मोर माटी के मितान रे।
उपर बादर खाल्हे धरती,
तय भुंईया के भगवान रे।।
* एक अहिल्या तारिस कहिथे,
कौशिला के श्री राम ह।
दूसर अहिल्या तय ह तारे
मोर भुंइया के भगवान ह।। तन उघरा मन उजरा हे,
गंवई गांव के किसान ।
तोर मेहनत ले सबो पाथें,
दार चांउर अऊ पिसान ।।
सबके पेट के आगी बुझाके,
खुद अंगरा ल खावत हस।
धरती दाई के सेवा बजाके
ओकरे गुन ल गावत हस।।
गढ़े विधाता तोला रे संगी .....माटी के मितान रे!
उपर बादर खाल्हे धरती,,.भुंईया के भगवान रे!!
* तोर छुए लकड़ी बन जाथे,
नांगर लाठी अउ तुतारी।
गंगाजल पानी बन जाथे,
जेला जटा बोहे त्रिपुरारी।। माटी छुए सोना हो जाथे,तोर करम पारस समान!
गढ़े विधाता तोला रे संगी ...माटी के मितान रे!
उपर बादर खाल्हे धरती,भुंईया के भगवान रे!!
* छितका कुरिया रंगमहल ,
तोर खेतीखार फुलवारी ।
सुख के निंदरी तय सुतथस,
जस राजमहल अटारी। थकहा तन ल डार देथस,लकड़ी के बने मचान रे !
गढे विधाता तोला रे संगी, माटी के मितान रे !
उपर बादर.खाल्हे धरती, ...भुंईया के भगवान रे!!
________________*********___________
नोहर आर्य
फरदडीह,(डौंडीलोहारा) जिला बालोद, छ.ग ।
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गढ़े विधाता तोला रे संगी,
मोर माटी के मितान रे।
उपर बादर खाल्हे धरती,
तय भुंईया के भगवान रे।।
* एक अहिल्या तारिस कहिथे,
कौशिला के श्री राम ह।
दूसर अहिल्या तय ह तारे
मोर भुंइया के भगवान ह।। तन उघरा मन उजरा हे,
गंवई गांव के किसान ।
तोर मेहनत ले सबो पाथें,
दार चांउर अऊ पिसान ।।
सबके पेट के आगी बुझाके,
खुद अंगरा ल खावत हस।
धरती दाई के सेवा बजाके
ओकरे गुन ल गावत हस।।
गढ़े विधाता तोला रे संगी .....माटी के मितान रे!
उपर बादर खाल्हे धरती,,.भुंईया के भगवान रे!!
* तोर छुए लकड़ी बन जाथे,
नांगर लाठी अउ तुतारी।
गंगाजल पानी बन जाथे,
जेला जटा बोहे त्रिपुरारी।। माटी छुए सोना हो जाथे,तोर करम पारस समान!
गढ़े विधाता तोला रे संगी ...माटी के मितान रे!
उपर बादर खाल्हे धरती,भुंईया के भगवान रे!!
* छितका कुरिया रंगमहल ,
तोर खेतीखार फुलवारी ।
सुख के निंदरी तय सुतथस,
जस राजमहल अटारी। थकहा तन ल डार देथस,लकड़ी के बने मचान रे !
गढे विधाता तोला रे संगी, माटी के मितान रे !
उपर बादर.खाल्हे धरती, ...भुंईया के भगवान रे!!
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नोहर आर्य
फरदडीह,(डौंडीलोहारा) जिला बालोद, छ.ग ।

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