दर्द मिले हे तोर डहर ले ।
गिरे टुरी तै मोर नजर ले ।
जा तै चले जा , छोड़ के मोला ।।
प्यांर के अब तै दुहाई झन देबे ।।

प्यांर मोर परख नइ सके ।
चाहत ल समझ नइ सके ।
अच्छा तो करे तै करके बेवफाई ।।
बेवफाई के अब सफाई झन देबे ।।

तै मोला बरबाद कर दिये ।
जिनगी गमसाद कर दिये ।
अब खेल ले दुसर के दिल संग ।।
खुद ल तै कभु तन्हाई झन देबे ।।

मोर जखम ह मिटही कब ।।
 तोर आदत ह छुटही कब ।।
जहर खवाबे , तो पकड़ा जाबे ।।
अइसे करबे के दवाई झन देबे ।।

        **कृष्णा पारकर**

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