भारत मेरा देश है,सकल गुणों की खान।
ऋषि मुनियों के वेश में,करते लाख बखान।।
रंगीला मेरा वतन,सतरंगी है फाग।
समता ममता है भरा,बहे प्रेम अनुराग।।
राम कृष्ण की ये धरा,बहती गंगा धार।
मर्यादा का पाठ है,गीता की बौछार।।
राजगुरू सुखदेव ने,माना अपनी जान।
त्यागे अपने प्राण को,सदा बढ़ाया मान।।
तेरे मेरे फेर में,बँटे नहीं इन्सान।
अपना जाने देश को,होगा तभी महान।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

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