माया अंतरजाल का,सिमट गया संसार।
सारा जग है हाथ में,किसका रहा विचार।।
किसका रहा विचार,समझ कोई समझावे।
एक पलक में ज्ञान,हाथ अपने आ जावे।।
कह तोषन कविराज, सुगम हमने हल पाया।
समझे इसका मान,जाल का अंतर माया।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

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