तेरा मेरा कुछ नहीं, जाए भी न कुछ कहीं,
समर भूमि में कान्हा,गीता जो सुनाते हैं।
करम मे ध्यान रख,धरम महान रख,
बिना कोई करम के,फल नहीं पाते हैं।
नहीं कोई छोटा बड़ा,किस बात पे है अड़ा,
छोड़ सब मोह माया,कमान उठाते हैं।
मुझसे ही पैदा होते,मुझमें ही आके खोते,
गीता ज्ञान अर्जुन को,कृष्ण जी बताते हैं।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

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