तोर नखरा भी मोला प्यांर कस लागथे ।।
अब हर दिन मोला तिहार कस लागथे ।।
मै तोर मस्ती पी के, मताए ही रहिथंव ।।
पर दुनिया काबर मतवार कस लागथे ।।
एक नजर मे दिल चानी चानी करदेथे ।।
तोर नैना' दु धारी तलवार कस लागथे ।।
बड़ भाग्य वाला हौं' जो तोला पाए हौं ।।
तोर मिलना भी चमत्कार कस लागथे ।।
तोर से ही मोर जीवन उजियार हावय ।।
तोर बिना गोरी, अंधियार कस लागथे ।।
तोर आए ले, मोर तन्हाई खतम होगेे ।।
हर दिन' शनिचरी बजार कस लागथे ।।
**कृष्णा पारकर**
0 टिप्पणियाँ