हमर हाना ,हमर खजाना

* हमर हाना ,हमर खजाना *
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बात बात मा झगरा बाढ़े,फोही मा बाढ़े कान।
तेल फूल मा लइका बाढ़े,सुन लव गा सुजान ।।
चार दिन के चाँदनी फेर अंधियारी रात।
बोहत गंगा मे हाँथ धोय।अपन हाँथ जगन्नाथ ।।
भगाय मछरी जाँध असन,मुड़ ले बड़े माड़ी।
घर मे भूरी भांग नइहे,दाहरा के भोरहा खाय बाढ़ी।।
एक हाँथ खीरा के नौ हाथ बीजा,मइके के ठिकाना निही
जात हावे तीजा।।
चलनी मे दूध दुहे,करम ल दोस देय।
                      लइका हागे जाँध त कोनो काट नइ देय।।
अपन बइठ खइनिया खाय,दूसर ल सिखावन देय।
खाय अउ गठरी बांध के घर ले जाय।
खावत मोर अंचोवत ले बिरान।
पेट भरे न पुरखा तरे,कंऊवा कटरे ले ढोर नइ मरे।
गंहू संग कीरा रमजाय।पर खांचा खने अपने झपाय।
बोकरा के जीव जाय खवइया बर अलोना।
फूटहा करम के फूटहा दोना,पसिया गंवागे चारों कोना।
जइसन करनी वइसन भरनी।
घुरवा के घलो बहुरथे।
काम के न कौड़ी के,गियारा बेटा राम के।
नवा बइला के नवा सींग चल रे बइला टिंगे टिंग।
भंईसा सींग भंईसा ल भारी।
नहाय नंगरा निचोय काला। सारी रउती करके जपत हे माला।।
दुब्बर ल दू असाड़ ।
पढ़े बर रमायेन पोथी,कीरा परय भीतर कोती।
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                    नोहर आर्य
फरदडीह,(डौंडी लोहारा)जिला बालोद,छ.ग

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