तुमने जो अगर (परमानंद प्रकाश)

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तुमने जो अगर दिल से पुकारा नहीं होता 
तुम आज मेरे तो, मै तुम्हारा नहीं होता

मै मर ही गया था, तेरे इस जुल्म-ओ- सितम से
जो रब का अगर मेरे इशारा नहीं होता

जिस रात मेरे ख्वाब मे आती नहीं है तू 
उस रोज मेरे दिन का गुजारा नहीं होता

हाँ साँथ मेरे तू जो चले राह में तो ठीक 
बिन तेरे मुझे चलना गवारा नही होता

"परमा" को तेरा प्यार अगर होता जो हासिल
तो गर्दिशो मे मेरा सितारा नही होता

- परमानंद प्रकाश,गुरुर,छत्तीसगढ

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