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From: तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा <yoyokumartoshan@gmail.com>
Date: Wed, Jan 15, 2020, 1:05 PM
Subject: सरस्वती शिशु मंदिर में मनाया गया मकर सक्रांति पर्व
To: Srijan Sandesh <vidyabharticg@gmail.com>
From: तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा <yoyokumartoshan@gmail.com>
Date: Wed, Jan 15, 2020, 1:05 PM
Subject: सरस्वती शिशु मंदिर में मनाया गया मकर सक्रांति पर्व
To: Srijan Sandesh <vidyabharticg@gmail.com>
स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा में मकर संक्रांति पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।मुख्य अतिथि श्री तोरन सिंह ठाकुर विशेष अतिथि डोमेंद्र देशमुख अध्यक्षता महेश जी सपहा के द्वारा मां सरस्वती के प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन कर मकर सक्रांति पर्व का शुभारंभ किया गया ।स्वागत के पश्चात भैया बहनों द्वारा मकर संक्रांति पर्व के संबंध में विभिन्न प्रकार के गीत कविताएं भाषण प्रस्तुत किए गए जिनमें से कक्षा षष्ठ से भैया कमलेश विश्वकर्मा बहिन मानसी ,योगिता ठाकुर कक्षा अष्टम से भैय्या प्रेम प्रकाश ठाकुर बहिन लक्ष्मी देवांगन कक्षा सप्तम से भैय्या देवेंद्र पटेल कक्षा नवम से बहिन लालिमा ठाकुर भैय्या जयवर्धन पाल सिंह पटेल कक्षा दशम से भैया तुलेश्वर ठाकुर बहिन नेहा पटेल द्वारा संक्षिप्त उद्बोधन प्राप्त हुआ ।मुख्य अतिथि उद्बोधन में श्री तोरन ठाकुर ने सक्रांति पर्व पर अपने विचार व्यक्त किए की यह जो पर्व है आपसी भाईचारे का पर्व है जो कि हमें एक सूत्र में बंधे रहने का संदेश देती है इस पर्व में तिल और गुड़ को मिलाकर जो लड्डू बनाया जाता है और उसे अपने इष्ट मित्रों को वितरण किया जाता है लेकिन यह भी बताया की तिल और गुड़ अलग अलग रह कर कभी एक नहीं हो सकते लेकिन जब तिल और गुड़ एक साथ मिलकर एक लड्डू का आकार लेता है एक सूत्र में बन जाता है और अपनी मिठास से सभी लोगों को आनंदित करता है ऐसे ही यह एकता व भाईचारा का पर्व हम सबके लिए प्रेरणादायक है हमें अपनी पुरखों की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए मकर संक्रांति के दिन प्रातः काल स्नान करके अपने आसपास के लोगों को तिल और गुड़ का दान करना चाहिए। जिससे आपसी सद्भाव भाईचारा और सूर्य के प्रति अपनी आस्था हमेशा झलकती रहे । भगवान सूर्य आज के दिन दक्षिणायन से होकर उत्तरायण को मकर राशि में प्रवेश करता है, जो कि हम सभी के लिए हम सभी के लिए शुभ फलदायक है । मुख्य वक्ता ने अपने उद्बोधन में बताया कि मां दुर्गा ने किंकर नामक राक्षस का नाश किया। जोकि छत्तीसगढ़ी में तीन सकरात के नाम से जाना जाता है जो जाते समय अपने साथ कुछ ना कुछ लेकर जाता है और उसका खामियाजा हम सभी को भुगतना पड़ता है ।अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य महोदय ने सभी भैया बहनों को मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं संप्रेषित करते हुए कहा यह पर्व हम सभी के लिए मंगलकारी है। इस दिन हमें अन्न दान लड्डू दान या किसी भी प्रकार का दान हमें अवश्य करना चाहिए । इस दिन से लेकर आने वाले समय के लिए दिन की जो स्थिति है बड़ी हो जाती है और रातें छोटी हो जाती है । इस प्रकार भैया बहनों को समस्त आचार्य दीदियों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन बौद्धिक प्रमुख श्रीमती प्रतिभा सुकतेल द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त आचार्य दीदियों एवं भैया बहन उपस्थित रहे उक्त जानकारी जिला प्रचार प्रसार प्रमुख तोषन कुमार चुरेन्द्र ने प्रदान की।

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