हाना अउ गाना

* हाना अउ गाना *
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  हाना अउ गाना जी,हाल कमाना हाल खाना।
  पुरखा ल सांप चाबे , डोरी ल डर्राय।
   घर में नाग देवता ,भिंभोरा पूजे ल जाय।।
   लाज सरम ल पाछू कर,ढूंटी पेट ल आगू कर।
   फोकट के पाय त मरत ले खाय।
   भंईसा लड़ई मे जरई के जीव जाय।
   लकर धकर के घानी आधा तेल आधा पानी ।
   कमाय लइक हर जांगर ओतियाय जरे जिनगानी।
  थूंक थूंक मा बरा चुरोय।
   कब बा मरे त कब बरा चुरे।
   हथ्थी के पेट मे सुहांरी।
   ऊंट के मुँहू मे जीरा।
    पानी बोहाय ले पार नइ बंधाय।
    मेकरा के मुते ले रेला नइ बोहाय।
    सुते बेर मुते ल जाय,उठ उठ के घुघरी खाय।
  आवन लगे बरात त ओंटन लगे कपास।
   पुछे भात खाय बिन पूछे लात।
   दही के भोरहा मा कपसा ल खाय।
  दूधो गे दुहना गे।
  ढोल तरी पोल मसाल तरी अंधियार।
  मुड़ मुड़ाना हे त छुरा ल थोरे डर्राबे।
  हंड़िया मुँहू बर परई आदमी के मुँहू बर का।
पइधे गाय कछारी जाय।
दुधारू गाय के लात सुहाय।
एकठन लइका गांव भर टोनही।
बर न बिहाव छट्ठी बर धान कूटे।
खाय मुसुवा मटकाय कान।
ररुहा सपनाय दार भात।
तइहा बात ल बइहा लेगे।

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     संकलन
  नोहर आर्य, फरदडीह(डौंडी लोहारा)जिला बालोद,छ.ग,

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