बड़े दिनों बाद(तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा)

बड़े दिनों बाद...

बड़े दिनों बाद एक बात दिल में आई है।
अपनों के भीड़ में भी कितनी तन्हाई है।

गुजारा हुआ हर पल आज कहता है मुझसे,
अब तेरी वफा में न जाने ये कैसी रूसवाई है।

बहती ये हवाएँ भी सदाएँ देती है हमको,
पहले की वफा हँस कर फिर क्यूँ बेवफाई है।

लौटकर न आना कभी जा अब दूर कहीं,
मेरे दिल की गली से सब दिन की बिदाई है।

ये फिजायें ये गुलशन भी बातें नहीं करते,
कहते ही रहते हमें ये "धनगंइहा" हरजाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
ईकाई डौंडी लोहारा

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