* साँच ल नइहे कोनो आँच *
________*****_________
झूठ लबारी के डारा म,
कमजोरहा फूल फूलथे।
सच ह जब आगू आथे,
तब सारी भेद ह खुलथे।।
सौ लबारी त एक साँच,
सौ झूठ बर भारी पड़थे।
कतको तिपो ले सोना,
ओतके वो ह निखरथे।।
साँच बरोबर पुन नहीं,
झूठ बरोबर नहीं पाप।
साँच ल कभू आँच नहीं,
साँच के माला ल जाप।।
साँच बर हरीशचंद दानी,
कतका दुख ल पाइन।
जीत अपन कठीन परीछा ,
जग म नाम कमाइन।।
सत अहिंसा के मारग ल,
गाँधी बबा चलाइन।
भारत ल आजादी देके,
सुग्घर सुराज लाइन।।
__________******___________
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।
________*****_________
झूठ लबारी के डारा म,
कमजोरहा फूल फूलथे।
सच ह जब आगू आथे,
तब सारी भेद ह खुलथे।।
सौ लबारी त एक साँच,
सौ झूठ बर भारी पड़थे।
कतको तिपो ले सोना,
ओतके वो ह निखरथे।।
साँच बरोबर पुन नहीं,
झूठ बरोबर नहीं पाप।
साँच ल कभू आँच नहीं,
साँच के माला ल जाप।।
साँच बर हरीशचंद दानी,
कतका दुख ल पाइन।
जीत अपन कठीन परीछा ,
जग म नाम कमाइन।।
सत अहिंसा के मारग ल,
गाँधी बबा चलाइन।
भारत ल आजादी देके,
सुग्घर सुराज लाइन।।
__________******___________
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

0 टिप्पणियाँ