ढेरा आंटत जिनगी अंटागे,
घर कुरिया कुटका बंटागे।
भाई-भाई के झगरा म,
बीच अंगना परदा खंड़ागे ।।
* धन जोगानी सबो नपागे,
दाई- ददा के कोरा कंटागे ।
एके कोख ले जनमे भाई,
फाटे दूध-पानी कस छंटागे।।
तागा- तागा जोड़ के,
सुनता के डोरी ल बांधिस।
किलिर-कालर के झगरा मे,
अपनेच चेत ल हारिस ।।
* राम-भरत कस भाई ल,
मुड़ ढक्की मंथरा लड़ाइस।
आँसू ढारे कपटी आँखी म,
बाली अउ सुग्रीव बनाइस।।
भाई कस हितवा नहीं,
भाई कस नहीं बइरी।
कोन सुवारथ में परके
सुख के मता दिस गइरी ।।
___________*****____________
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।
घर कुरिया कुटका बंटागे।
भाई-भाई के झगरा म,
बीच अंगना परदा खंड़ागे ।।
* धन जोगानी सबो नपागे,
दाई- ददा के कोरा कंटागे ।
एके कोख ले जनमे भाई,
फाटे दूध-पानी कस छंटागे।।
तागा- तागा जोड़ के,
सुनता के डोरी ल बांधिस।
किलिर-कालर के झगरा मे,
अपनेच चेत ल हारिस ।।
* राम-भरत कस भाई ल,
मुड़ ढक्की मंथरा लड़ाइस।
आँसू ढारे कपटी आँखी म,
बाली अउ सुग्रीव बनाइस।।
भाई कस हितवा नहीं,
भाई कस नहीं बइरी।
कोन सुवारथ में परके
सुख के मता दिस गइरी ।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

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