* बेटी बरोबर बहु ल मानव *
_________***__________
पर दुवारी के होथे सुवारी,
बेटी होवय चाहे बहु।
दुनो के एके मान होथे,
असने समझतीन कहूँ ।।
आए बहु ह लछमी होथे,
जाए बेटी ह पहुना।
बेटी बरोबर बहु ल मानव,
काबर कहिबो कोनो ल। दाईज के दानों मारे बर,
मन के बंबर ल बारौ। नेकी बदी ले दुरिहा होके,
सुमत के दीया ल सारौ।।
झगरा मताथे का लाय?
पूछतन हम ते का पाय? लछमी बहु ल लात मारके,
कोन सा त॓य गंगा नहाय।।
मया पिरीत ह बने रहे,
काबर होतिस नाश।
जे घर के बने हे सास,
सरग बन जाही खास।।
कतको कमाही बहु बूता,
कमचोरहीन कहाथे।
आड़ी काडी छियय नहीं,
बेटी कमेलीन कहाथे।।
वहू बेटी दूसर के बहु,
लबारी ये त बता दे कहुँ ।
का तंय बुध राखे,
ओकरो हाल हलाही।
माटी तेल सस्ता हे,
का जनी कोन जराहीं।।
________****__________
नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ ।
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पर दुवारी के होथे सुवारी,
बेटी होवय चाहे बहु।
दुनो के एके मान होथे,
असने समझतीन कहूँ ।।
आए बहु ह लछमी होथे,
जाए बेटी ह पहुना।
बेटी बरोबर बहु ल मानव,
काबर कहिबो कोनो ल। दाईज के दानों मारे बर,
मन के बंबर ल बारौ। नेकी बदी ले दुरिहा होके,
सुमत के दीया ल सारौ।।
झगरा मताथे का लाय?
पूछतन हम ते का पाय? लछमी बहु ल लात मारके,
कोन सा त॓य गंगा नहाय।।
मया पिरीत ह बने रहे,
काबर होतिस नाश।
जे घर के बने हे सास,
सरग बन जाही खास।।
कतको कमाही बहु बूता,
कमचोरहीन कहाथे।
आड़ी काडी छियय नहीं,
बेटी कमेलीन कहाथे।।
वहू बेटी दूसर के बहु,
लबारी ये त बता दे कहुँ ।
का तंय बुध राखे,
ओकरो हाल हलाही।
माटी तेल सस्ता हे,
का जनी कोन जराहीं।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ ।

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