आगे सावन सम्मारी,
धरे हाँथ म पूजा थारी।
जाबोन शिव के मंदिर,
मनाबोन भोला भंडारी ।।
सबो जाबो चलो स॔गवारी,
बहु बेटी या होवय कुंवारी ।
होही मन के मनौती पूरा
करबो पूजा डमरू धारी ।।
बेल पतिया फूल चढ़ाबो,
करके पूजा भोला मनाबो।
गांजा धतूरा के हुम देके,
चना दार के भोग लगाबो।।
सावन के हर सम्मार,
ऐकर हेअब्बड परमान।
करे पूजा रही के उपासा,
होथे पूरा मन के आशा।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

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