* बिहाव *
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धरे धुराय लगिन मांड़गे,
दूल्हा दूल्हिन के करम छांड़गे।
जोरा तोरा गठरी गठियागे,
दाई ददा के करम नठियागे।।
कोरोना कर दिस बाराहाल,
सन दू हजार बीस के साल।
आसो के बिहाव बाजा न गाजा,
सूख्खा रुख्खा हे दूल्हा राजा ।।
बिना बराती के दूल्हा,
काकर बर बारय मांदी चूल्हा ।
मोटर हे न तो कार ,
गाड़ी घोड़ा सब बेकार ।।
दू चार बरतिया जाना हे,
समाजिक दूरी बढ़ाना हे।
सादा नेंग नत्ता करके,
नवा दूल्हिन ल लाना हे।।
आदर्श बिहाव के रिवाज चलगे,
हुड़दंग बराती मन ल खलगे।
न डीजे न नांगिन डांस,
मंदहा डांसर के नइहे चांस।।
__________******___________
नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।
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धरे धुराय लगिन मांड़गे,
दूल्हा दूल्हिन के करम छांड़गे।
जोरा तोरा गठरी गठियागे,
दाई ददा के करम नठियागे।।
कोरोना कर दिस बाराहाल,
सन दू हजार बीस के साल।
आसो के बिहाव बाजा न गाजा,
सूख्खा रुख्खा हे दूल्हा राजा ।।
बिना बराती के दूल्हा,
काकर बर बारय मांदी चूल्हा ।
मोटर हे न तो कार ,
गाड़ी घोड़ा सब बेकार ।।
दू चार बरतिया जाना हे,
समाजिक दूरी बढ़ाना हे।
सादा नेंग नत्ता करके,
नवा दूल्हिन ल लाना हे।।
आदर्श बिहाव के रिवाज चलगे,
हुड़दंग बराती मन ल खलगे।
न डीजे न नांगिन डांस,
मंदहा डांसर के नइहे चांस।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

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