जइसे के लिपट जाथे सांप चंदन से ।
वइसे ही लिपट जातेंव तोर बदन से ।
हमर प्रेम कहानी तो बहुत पुराना हे ।
तोर संग मे मया हे मोला बचपन से ।
कह नइ सकेंव, तेन बात अलग हे ।
चाहथौं मै तोला गोरी सच्चा मन से ।
नजर से तहीं कुछ ईशारा तो कर दे ।
राहत दिलादे मोर दिल के चुभन से ।
शीशा समझ के तै तोड़ झन देबे न ।
दिल तोला दिये हौं राखबे जतन से ।
काबर तै निकले रहे बिना चुनरी के ।
तोरे चर्चा सुने हौं आज सब झन से ।
**कृष्णा पारकर**
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