दिल धड़कत रहिथे, तोर नाम ले लेके ।
कईसे कहौं जुबान मे नाम नई आवय ।

तोर सुरता, मोर जिये के आधार होगे ।
तोर सुरता के बिना अराम नई आवय ।

रोजेच घपटे रहिथे, बस दुख के बादर ।
मोरे अंगना मे काबर' घाम नई आवय ।

माथा पिरातिस तो मै गोली खा लेतेंव ।
आंसु बर मोला , रोकथाम नई आवय ।

पहिली दारू के नशा मे नींद आ जाए ।
अबतो दारु घलो हर काम नई आवय ।

           **कृष्णा पारकर**

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