बड़ा गहरा हे पानी तै उतरबे झन ।
तै दुरिहा ले देख, कुछु करबे झन ।

पानी के कार-बार, होथे रे खतरा ।
ऊथलु समझ के बने टमरबे झन ।

बोले बात ठीक'हे, बने बिचार ले ।
भरे जवानी मा पगली मरबे झन ।

भऊजी कहिके चिढ़ाही टुरा मन ।
मोर गली से अब तै गुजरबे झन ।

अब जा तै घर बने ढंग से नहाबे ।
फेर लंद-फंद साबुन चुपरबे झन ।🤣😜

         **कृष्णा पारकर**

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ