बरखा लेके आए हे सावन, जाने तै कब आबे ।
कब सुनबे तै बात मन के,कब मोला पतियाबे ।
गिन- गिन के गुजारे हौं, मै तोर बिन हर- दिन ।
मन तरसे बोली सुने बर,कब गुरतुर गोठियाबे ।
का तोला मया नई हे , तोर दिल मे दया नई हे ।
सावन तो बरसगे तोर मया ल तै कब बरसाबे ।
प्यार के कांटा तो अईसे हे जो घाव गहरा देथे ।
सुरता पाछु छोड़य नही ,तै जाके कहां लुकाबे ।
अबड़ मया करथौं पगली, देख तो सही आके ।
मछली पकड़के लाहुं मै,तै भुंज भुंज के खाबे ।😜
कब सुनबे तै बात मन के,कब मोला पतियाबे ।
**कृष्णा पारकर**

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