* बिन सुर के मोटियारी मटके *
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पानी बादर,छिटिर छाटर।
चिखला पानी किचिर काचर।।
भरका खोधरा छिपिर छापर।
गिरय पानी टिपिर टापर।।
रेंगय खेतिहारीन थतर मतर,
बिछलय गोड़ जतर कतर।।
चिखला माटी लसर फसर,
गरवा रेंगय तरर मरर।
धुके हावा सरर सरर,
मेंचका नरियावय टरर टरर।।
रूख राई करे झरर झरर,
कीरा उड़य भरर भरर।।
सावन महिना बड़ मनभावन,
तीज तिहार के लग गे दावन।
डोकरी हाँसय मुसुर मुसुर,
डोकरा रेंगय धुसुर धुसुर ।।
जांघ के जात चिखला छटके,
बिन सुर के मोटियारी मटके।।
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नोहर आर्य,
फरदडीह,जिला बालोद,छत्तीसगढ़ ।

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