*_जतन अपन गाँव के_...*
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करलव दीदी ओ करलव भैया गा,
जतन अपन गाँव के।
कोयली बोली चिंहूँर माते,
बर पीपर के ठाँव के।
करलव दीदी ओ.....
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नदियाँ नरवा खेती डोली के,
करलव गा तियारी।
नाँगर बइला चेत करलव,
धनहा अउ बियारी।
छुनुर-छुनुर बाजय पइरी,
धरती दाई के पाँव के।
करलव दीदी ओ....
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कातिक आईस कोठी भरगे,
भाग हा लहरागे।
ओढ़े कमरा डोकरी दाई,
हाँड़ा कपकपागे।
सगा के संदेश देवय,
सुनव कँऊवा काँव काँव के।
करलव दीदी ओ....
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लाली पिंवरी फूल फूले,
भुँइया के फूलवारी मा।
सतरंगी फगुवा माते,
लइका के किलकारी मा।
नंगारा कस बादर गरजे,
दनदनादन दाँव के।
करलव दीदी ओ....
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भुँइया के सिंगार करव,
रूख राई लगावव।
भारत माता के दुलौरिन,
छत्तीसगढ़ ला बचावव।
बघवा कस हूंकार देवव,
दगदगले हाँव के।
करलव दीदी ओ.....
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रचनाकार:-
तोषण चुरेन्द्र दिनकर
धनगांव, डौंडी लोहारा
बालोद,छत्तीसगढ़
08/09/20

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