बिहाव बर लड़का वाला मन के घला अब्बड़ नखरा
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बिहाव बर लड़का वाला मन के घला अब्बड़ नखरा ।
देखत लें मीठा मन्दरस , सगई बाद गोठ पखरा ।।
हम लड़का वाला अन , कईके मेंछा अईठत हे ।
अंगना मा बईठे , घर भर ला कनेखि देखत हे ।।
पांव परेबर,चाय देबर ता कभू पानी ओखी बलाथे ।
नाम बतावत दुलौरिन बेटी असकटावत लजाथे ।।
लड़की ला कथे , ऐ तो हावय बुटरी काठी ।
होवईय्या समधीन घला, दिखय निच्चट देहाती ।।
लड़का के दांत दिखे खैरी , गुटका मुहू दबा हे ।
टेडगा कटिंग कटाय , सुंदर नोनी बर बानी लगा हे ।।
दिखत के सेफला टुरा , नोनी ला हीनत हे ।
5वी पास अपन , कालेज वाली ला चुनत हे ।।
गोत पुछत नाम बदले बर घला हावय तैयार ।
लड़की वाला मन के भावना कतको करें ब्यापार ।।
लड़की-लड़की हे ता धन्हा डोली के आशा हे ।
सऊहत रानी बनाके रखही हमर बेटा राजा ऐ ।।
कोनों बेटी ला दहेज ता कोनों ल रुप-रंग के ताना ।
लड़का वालेअन कहात दुनिया लें बाहिर बताना ।।
ते पाय के कथो मेंहा..........
घेरी - बेरी सगामन के मना करअई मा.....
दाई- ददा के आंसू बोहाय फिजगे अछरा............
बिहाव बर लड़का वाला मन के घला अब्बड़ नखरा ।
देखत लें मीठा मन्दरस , सगई बाद गोठ पखरा ।।
कब मोर देश समाज लड़की-लड़का भेद लें ऊबर ही
सऊहत ऐ पावन भुईया मा सरग हां सुघ्घर ऊतर ही
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