*आल्हा छंद*
*राम नाम*
आये हावस जग मा संगी,भजले राम नाम तँय थोर।
नइ भजबे ता बिरथा जाही,बात मानले थोरिक मोर।।
बेटा बेटी काम न आही,धन दौलत नइ जावय साथ।
आही यमराजा लेगेबर,मलते रहिबे तैहर हाथ।।
द्रोणा जइसे गुरु हे चलदिस,चलदिस बाली बलवान।
आही आरी पारी इकदिन,अतका संगी सबके जान।।
कोनों बाँचे रहय नही गा,जाए बर परही शमशान।
जीयत भरले तैहर भइया,राम नाम करले गुणगान।।
जपत जपत रत्नाकर तरगे,राम नाम हे लिखदिस सार।
चढ़जा नइया दीदी भइया,हो जाबे ये भव ले पार।
तोषण दिनकर काहत हावय,गाले तैहा हरि के नाम।
नइ गाबे ता तँय पछताबे,बन जाही सब बिगड़े काम।।
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तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर' {सरपंच/साहित्यकार}
धनगाँव डौ.लोहारा

1 टिप्पणियाँ
कितने लोगों ने देखा ऐसा भी कालम बनाईये आदरणीय... ताकि समझ आ सके कि कितने रीडर व्यूअर है...धन्यवाद
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