*मुखड़ा*
तैहा दिया देखाये गा तुलसी
रामायण सिरजाई के
तैहा गंगा नँहवाये गा तुलसी
राम भजन ल गाई के..
*अंतरा*
अवघड़ दानी शंकखर भोला
सती ल कथा सुनाये~~~
कँऊवा तरगे गिधवा तरगे
राम के ध्यान लगाये~~~
नारद बीना बजाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.......1
*अंतरा*
गोड़ ल धोके केवट तरगे
पुरखा ल पार लगाये~~~
नवधा सुनके शभरी उबरगे
हरि के धाम ल पाये~~~
हनुमत चुटकी बजाये गा तुलसी
भक्ति के धुन ल गाई के....2
*अंतरा*
राम नाम के अमरित धारा
गाँव गली म बोहाये~~~
आवय संगी दीदी भइय्या
मिल जयकारा लगाये~~~
तोषण खुशी मनाये गा तुलसी
हरि भजन ल गाई के.....3
©®
तोषण चुरेन्द्र{दिनकर}
धनगाँव डौंडी लोहारा
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