मितवा जल जंगल जमीं (तोषण चुरेन्द्र धनगांव)

मितवा जल जंगल जमीं,इनसे ही है जान।
इसकी रक्षा हम करें,इतनी बातें मान।।
इतनी बातें मान,खिले ये जीवन अपना।
समय बड़ा बलवान,जाएगा हो सब सपना।
कह तोषण कविराज,सभी से बनकर हितवा।
चलो लगायें पेड़,एक हो सारे मितवा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा

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