गरजत हावय बादर 【कृष्णा पारकर 】【कविता】garjat have badar 【Krishna prakar 】【kavita】

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गरजत हावय बादर,
        अउ बरसत हे पानी ।
पानी के चक्कर मा,
       अधुरा रहिगे कहानी ।




तरसय रे मन तोर बर ,
मिलबे का बरसात मा।
तन मन ल भिंगा लेतेन,
हम दुनो  झन संग मा ।




सावन के बरखा मा ,
       कर लेतेन कुछु नदानी।
गरजत हावय बादर ,
         अउ बरसत हे पानी ।



अब तो जरूरी हावय ,
गोरी तोर मोर मिलन ।
अइसे तै झन तरसा रे,
झन बित जाय सावन ।




देखे हौं तोला जबले,
     लागे हे तोर बर बानी ।
गरजत हावय बादर,
      अउ बरसत हे पानी ।




मजा उड़ाले तै रानी ।
बित न जाए जवानी ।
             गरजत हावय बादर ।
           बरसत हावय रे पानी ।



                                        
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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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