गरजत हावय बादर,
अउ बरसत हे पानी ।
पानी के चक्कर मा,
अधुरा रहिगे कहानी ।
तरसय रे मन तोर बर ,
मिलबे का बरसात मा।
तन मन ल भिंगा लेतेन,
हम दुनो झन संग मा ।
सावन के बरखा मा ,
कर लेतेन कुछु नदानी।
गरजत हावय बादर ,
अउ बरसत हे पानी ।
अब तो जरूरी हावय ,
गोरी तोर मोर मिलन ।
अइसे तै झन तरसा रे,
झन बित जाय सावन ।
देखे हौं तोला जबले,
लागे हे तोर बर बानी ।
गरजत हावय बादर,
अउ बरसत हे पानी ।
मजा उड़ाले तै रानी ।
बित न जाए जवानी ।
गरजत हावय बादर ।
बरसत हावय रे पानी ।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
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