अंगना मा सुघ्घर कृष्णा पारकर कविता angna ma sughhar krishna parkar kavita

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अंगना मा सुघ्घर मोंगरा हा फुलगे ।
चेहरा हा तोर टुरी नैना  मा झुलगे ।




रिमझिम के बरखा मा ,
    जम्मो भुईयाँ हरियागे ।
       आज फेर अचानक ले ,
            तोर सुरता मोला आगे ।



 खेत खार के सबो रूख राई उल्हगे ।
अंगना मा सुघ्घर , मोंगरा हा फुलगे ।




बगिया मा कोयली ,
    मीठ बोली सुनावय ।
        तोर सुरता बईरी रे ,
            जीव मोर जलावय ।




सपना मा आए तै,आंखी मोर खुलगे ।
चेहरा हा तोर गोरी , नैना मा झुलगे ।

                                   

         

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                         Krishna parkar                          
  बिलासपुर सीपत
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