अंगना मा सुघ्घर मोंगरा हा फुलगे ।
चेहरा हा तोर टुरी नैना मा झुलगे ।
रिमझिम के बरखा मा ,
जम्मो भुईयाँ हरियागे ।
आज फेर अचानक ले ,
तोर सुरता मोला आगे ।
खेत खार के सबो रूख राई उल्हगे ।
अंगना मा सुघ्घर , मोंगरा हा फुलगे ।
बगिया मा कोयली ,
मीठ बोली सुनावय ।
तोर सुरता बईरी रे ,
जीव मोर जलावय ।
सपना मा आए तै,आंखी मोर खुलगे ।
चेहरा हा तोर गोरी , नैना मा झुलगे ।
Krishna parkar
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933
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