अंगना मा रुमझुम angna ma rumjhum [कविता kavita] [krishna parkar कृष्णा पारकर]

अंगना मा रुमझुम

अंगना मा रुमझुम ले मोंगरा फुलगे ।
आज फेर तोर चेहरा नैना म झुलगे ।



घुंघराली बाल अउ होठ लाल लाल ।
चुक चुक ले चेहरा गोरी गोरी गाल ।

मिरगिन कस रेंगना , पतली कमर ।
गेदराए जवानी , सोला साल उमर ।

कनिहा ले बेनी कारी नागिन कस ।
बोली हा तोर लागे रे मीठ मधुरस ।



माथा के बिंदिया मा चंदा लजाए ।
पांव के पईरी ला छुमछुम बजाए ।

प्रेम ग्रंथ के पन्ना ह फेर आज खुलगे ।
आज फेर तोर चेहरा नैना मा झुलगे ।

           **कृष्णा पारकर**
           बिलासपुर सीपत

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