अंगना मा रुमझुम
अंगना मा रुमझुम ले मोंगरा फुलगे ।
आज फेर तोर चेहरा नैना म झुलगे ।
घुंघराली बाल अउ होठ लाल लाल ।
चुक चुक ले चेहरा गोरी गोरी गाल ।
मिरगिन कस रेंगना , पतली कमर ।
गेदराए जवानी , सोला साल उमर ।
कनिहा ले बेनी कारी नागिन कस ।
बोली हा तोर लागे रे मीठ मधुरस ।
माथा के बिंदिया मा चंदा लजाए ।
पांव के पईरी ला छुमछुम बजाए ।
प्रेम ग्रंथ के पन्ना ह फेर आज खुलगे ।
आज फेर तोर चेहरा नैना मा झुलगे ।
**कृष्णा पारकर**
बिलासपुर सीपत
कोई भी अंश तोड़ मडोर कर प्रस्तुत न करें इस कविता से सम्बंधित सभी copyrigth इस वेबसाइट और कवि के पास है कविता कॉपी पेस्ट करने पर साईट और गीतकार का नाम जरुर दर्शाए नही तो कॉपीराइट एक्ट के तहत आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकता है सर्वसाधारण को सुुुचित किया जाता है।
बिलासपुर सीपत
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