फ़कत गेंद है [साहिल नायक ] fakat gaind hai [sahil nayak]



गेंद
अस्थिरता का प्रमाणिक वस्तु
जो अनवरत गतिमान
परन्तु मन-बेमन
चाहकर भी अस़मर्थ,,,विरोध को
और,
एक से दूसरे हाथों में
जकड़ने मजबूर
शायद,
उनका अस्तित्व हमारे लिए बे-अर्थ
पर
क्या यह परिभाषा गेंद की ही है?
नहीं
अपनी जिंदगी देखिये
समय के फेर में हम सब
फ़कत गेंद ही हैं।



  -साहिल नायक-
  कवि/गीतकार
     शास,माध्य,शा,- करैहा
    सुरही नरहरपुर,कांकेर,छ,ग,
9340389771
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