बड़ पछताएवं bad pachhtayev-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

बड़ पछताएवं गोरी ,
            तोर संग मया करके ।
जावत हौं दुरिहा तोर ले,
           आंखी मा आंसु भरके।



अपन जम्मो सुख ला ,
            तोरे उपर मा लुटाएवं ।
बिन सोचें मैं प्यार करेवं,
            तभे तो धोखा खाएवं ।



अब तो जिनगी जीना हे,
          सुरता तोला कर करके ।
जावत हौं दुरिहा तोर ले,
           आंखी मा आंसू भरके ।



नइ भुलाववं गोरी मैं हा ,
       तोर चारदिनिया प्यार ला ।
मोर तरफ ले अलविदा,
            तोर सुघ्घर संसार ला ।


अच्छा करे तै बही टुरी,
          वादा ले अपन मुकर के ।
जावत हौं दुरिहा तोर ले,
            आंखी मा आंसू भरके ।
देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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