निंद उड़ जाथे मोर ।
आंखी आंखी झुलथे ,
मोहनी सुरतिया तोर ।।
तै जब ले फंसाए प्यार मा ।
बोहावत मया के धार मा ।।
मन हा मोहाए मोर वो गोरी।
पईरी के तोर झनकार मा ।।
जिनगी उजियारे मोर,
तोर रूप के अंजोर ।।
जब आथे तोर सुरता,
नींद उड़ जाथे मोर।।
काजर तै लगाए रे ,
तोर आंखी के कोर ।
चुंदी ला बिखराए रे,
छा गे घटा घनघोर ।।
आंखी आंखी झुलथे,
गोरी रे चेहरा तोर ।।
आ के मोर जिनगी मा,
तै मया के रस घोर ।।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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