मनमोहनी रे तोर मया मा manmohni re tor maya ma[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

मनमोहनी रे तोर मया मा,
       पगला जईसन हाल होगे ।
बीच गली मा आंखी मारे,
       गांव भर मा बवाल होगे ।



कतका दिन के किंजरत हौं,
         तोर पाछु मै होके अवारा ।
तोर छोड़ नइ देखेवं कोनो ल,
      तोर खातिर हाववं कुंआरा ।।



तहुं ल मोर ले प्यार हावय,
         बात तो बने कमाल होगे ।
बीच गली मा आंखी मारे,
         गांव भर मा बवाल होगे ।।



गोरी रे तोर गोरी चेहरा ,
        मन मा मोर समाए हावय।
तोर सुरता घटा बनके ,
        दिल मा मोर छाए हावय ।।


तोर मया के चढ़गे नशा,
      दरूहा कस मोर चाल होगे।
बीच गली मा आंखी मारे,
        गांव भर मा बवाल होगे ।।

    देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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