गोरी रे तोर गुलाबी चेहरा,gori re tor gulabi chehra-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

गोरी रे तोर  गुलाबी चेहरा ।
मोर नैना मा समाय हावय ।



तोला देख के लागथे जइसे ।
परी  उतर  के आए  हावय ।

तोर सुरता हा चारो मुड़ा मा।
बादल  बन के  छाए हावय ।



तोर मया के कुरिया म रानी ।
दिल हा मोर  धंधाए  हावय ।

दिल हे बिलकुल खाली गोरी।
एके बार धोखा  खाए हावय।



पुछत झन आबे फोन लगाबे।
निचे मा नंबर लिखाए हावय।
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देखेवं जबले तोला गोरी नींद उड़ागे मोर ।
मोला बिना बताए दिल दिवाना होगे तोर ।


देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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