संगी जहुरिया म बईठ के sangi jahuriya ma baith ke-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

संगी जहुरिया म बईठ के,
     करथस मोर गोठ बात ओ।
         मोला बता रानी मोर बिना,
              कइसे पहाथस रात ओ ।।

रतिहा मै छटपटावत रहथौं,
    सुरता आथे मुलाकात ओ ।
         कुछु नइ मांगव भगवान ले,
            मिल जाए बस तोर साथ ओ।।



कइसे रहेवं मै तोर बिना,
    अब मुश्किल हे हालात ओ।
           तोर बिना रे ए मनमोहनी,
                बासी मिठाए ना भात ओ ।



मोला फंसाए दिवाना बनाए,
     तै नैना ले करके घात ओ ।
          मोर अंगना तोला ले आहुं,
              मै भाँवर पराके सात ओ ।।



तोर जवानी के चढ़गे नशा,
     दारू के का हे बिसात ओ ।
          नइ छोड़वं मै तोला रानी ,
              अब धरले ना मोर हाथ ओ ।।


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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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