हां गोरी तोर कारण,ha gori tor karan-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

 
हां गोरी तोर कारण , जम्मो  संगी यार  छुटगे ।
हां गोरी तोर कारण , सबके मया दुलार छुटगे ।



तोर जइसे दगाबाज,झन मिले मयारू कोनो ल ।
तोर मया के कारण , देख मोर घर बार छुटगे ।



दुनिया दारी छोड़ के , आगेवं मै तोर पाछु रे ।
एक तोला पाए बर , मोर जम्मो संसार छुटगे ।



मार के तो चल दिये,सबुत काबर छोड़त हावस ।
मोर लाश के तीर मा,देख तोर हथियार छुटगे ।


हां रे गोरी तोर कारण,सबके मया दुलार छुटगे ।
मेहरबानी तोर प्यार के,जिए के अधार छुटगे ।

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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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