आंखी मा मोर , आंसू डबडभा गे ।।
तोर मया गोरी रे , मोर जीव के काल होगे ।
अच्छा भला मनखे , फोकट हलाल होगे ।।
मोर मया के फुल , देख तो मुरझा गे ।
गोरी अपन वादा , तै कइसे भुलागे ।।
जाना रिहिस छोड़ के,
त जिनगी मे आए काबर।
लबरी तोर मया मा ,
मोला तै फंसाए काबर ।
मीठ मीठ बोल के टुरी,
मन ला भरमाए काबर ।
जाना रिहिस छोड़ के ,
त जिनगी मे आए काबर ।
किरिया तै प्यार के ,
बिन सोंचे खाए काबर ।
का तोर बिगाड़ेवं मै ,
मोला नइ बताए काबर ।
मोहनी तोर प्यार के,
मोला तै खवाए काबर ।
मोर सुघ्घर जिनगी मा,
आगी तैं लगाए काबर ।
पथरा मोर दिल ला ,
अइसे पिघलाए काबर ।
छुप छुप के रोना ,
मोला तै सिखाए काबर ।
सुरता मे फेर आज तोर कहानी आगे ।
बिना बात मोर आंखी मा पानी आगे ।।
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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