आज फेर अचानक aaj fer achanak[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

आज फेर अचानक ,तोर सुरता आ गे ।
 आंखी मा मोर , आंसू डबडभा गे ।।

तोर मया गोरी रे , मोर जीव के काल होगे ।
अच्छा भला मनखे , फोकट हलाल होगे ।।



 मोर मया के फुल , देख तो मुरझा गे ।
गोरी अपन वादा , तै कइसे भुलागे  ।।

जाना रिहिस छोड़ के,
          त जिनगी मे आए काबर।
लबरी तोर मया मा ,
            मोला तै फंसाए काबर ।



मीठ मीठ बोल के टुरी,
            मन ला भरमाए काबर ।
जाना रिहिस छोड़ के ,
         त जिनगी मे आए काबर ।

 किरिया तै प्यार के ,
           बिन सोंचे खाए काबर ।
का तोर बिगाड़ेवं मै ,
           मोला नइ बताए काबर ।



मोहनी तोर प्यार के,
            मोला तै खवाए काबर ।
मोर सुघ्घर जिनगी मा,
            आगी तैं लगाए काबर ।

पथरा मोर दिल ला ,
            अइसे पिघलाए काबर ।
छुप छुप के रोना ,
           मोला तै सिखाए काबर ।


 सुरता मे फेर आज तोर कहानी आगे ।
बिना बात मोर आंखी मा पानी आगे ।।
देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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