कितनी तुमसे माेहब्बत है kitnai tumse mohbbat hai-[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

 
कितनी तुमसे माेहब्बत है,
           कैसे तुझे बताऊं यारा,
दिल मैं अपना चीर कर,
           कैसे तुझे दिखाऊं यारा,

वक्त का मारा हूँ मैं,
              बंधे हुए हैं हाथ मेरे ,
जी करता है उड़कर मैं,
           पास तेरे आजाऊं यारा,



अब तो सही जाए ना,
              मुझसे तेरी ये जुदाई,
सारे रस्मों को ताेड़कर,
          तुझको गले लगाऊं यारा,

इस दिल काे पनाह मिला,
              तेरी ही दहलीज पर ,
तेरे दर को छाेड़कर,
            बाेलाे कहां मै जाऊं यारा,



कास काेइ समझ सकता,
          मेरे दिल के इस दर्द काे ,
बात हमारी दुरियों की,
           किस किस काे बताऊं यारा,

अपना काेई लगता नहीं,
          एक तेरे सिवा जहान में,
क्यों ना खुद को भुलकर,
           तुझमे समां जाऊं यारा,



मुझकाे बहुत सताया है,
            इस जालिम संसार ने,
आकर तेरी बाहाें मे,
           मै सारे गम भुलाऊं यारा,

आैर काेइ भी जचता नहीं,
           तेरे सिवा इन आंखों को,
सामने तुमकाे बैठाकर,
           बस देखता ही जाऊं यारा,


लैला-मजनु,हीर-रांझा,
           माेहब्बत की मिसाल हैं,
साेंचता हूँ मै भी प्यांर में,
          नाम अमर कर जाऊं यारा,
देखा तुझे बस एक नजर, dekha tujhe bas ek najar, कृष्णा पारकर, हिंदी कविता, कविता, Krishna parkar, hindi kavita, kavita,
                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
                       +91 93404 04933
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