कोई रात गुजर जाने दे,
जालिम है यादें तुम्हारी ,
जो नींद भी न आने दे ,
रूसवा हुए कई इश्क मे,
हो गए कितने ही तबाह,
मुझको भी है करना इश्क ,
मुझको भी ठोकर खाने दे ,
तरसता रहा हूँ चाहत को,
पर वफा कहीं मिला नहीं,
अब तेरे संग उम्मीद की ,
एक दिया तो जलाने दे ,
लैला -मजनु , हीर- रांझे,
इश्क मे मजबूर हो गए ,
जिन्दगी हो तो तेरे संग हो,
वर्ना मौत को गले लगाने दे,
कितना तुमको चाहा मैने,
काश तुम ये समझ सको,
क्या करोगे अब तुम जानो,
थाम ले तु या बह जाने दे,
कृष्णा पारकर
बिलासपुर सीपत
+91 93404 04933


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