तेरे लिये मैने हर tere liye maine har[.Krishna parkar][hindi kavita][c.g kavita][kavita] [कृष्णा पारकर][हिंदी कविता][छ.ग. कविता][कविता]

इस ना मुराद दिल की चाह लिखता हूं ।
चलो आज मै अपनी गुनाह लिखता हूँ ।

मिल कर के तुमसे तेरा ही बन बैठा ।
आरजू है तुम्हारी सरे - राह लिखता हूँ ।
इस ना मुराद दिल की चाह लिखता हूँ ।



तुमने मुझे धोखा दिया या कि बेवफाई ।
मै इन सब बातों को अफवाह लिखता हूँ ।
चलो आज मैं अपनी गुनाह लिखता हूँ ।

मेरा गज़ल पढ़ कर करते हो वाह वाह ।
कभी तो समझो मै दिल आह लिखता हूँ ।
इस ना मुराद दिल की चाह लिखता हूँ ।



तेरे लिये मैने हर - दर पे सर झुकाया ।
कहीं मंदिर तो कहीं दरगाह लिखता हूँ ।
चलो आज मैं अपनी गुनाह लिखता हूँ ।

तुमने तो प्यांर किया मै ही ना समझा ।
तभी तो खुद को लापरवाह लिखता हूँ ।
इस ना मुराद दिल की चाह लिखता हूँ ।



प्यार करना कोई अगर सीखे तो तुमसे ।
मै तुम्हारे सजदे मे वाह वाह लिखता हूँ ।
चलो आज मैं अपनी गुनाह लिखता हूँ ।


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                             कृष्णा पारकर
                           बिलासपुर सीपत
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